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  • जिला उद्योग केन्द्र,मुजफ्फरनगर:- NEW REPORT:----- HINDI  & ENGLISH

    जिला उद्योग केन्द्र, मुजफरनगर

    1.विभाग का नाम:जिला उद्योग केन्द्र, मुजफरनगर।
    2.सूचना अधिकारी का नाम: श्री                  महाप्रबन्धक जिला उद्योग केन्द्र, मुजफ्फरनगर !
    3.दूरभाश नम्बर:0131–2622707
    4.फैक्स नम्बर:0131–2622707
    5.सहायक जन सूचना अधिकारी – श्री विजेन्द्र कुमार, प्रबन्धक जिला उद्योग केन्द्र, मुजफ्फरनगर !
    6.अपीलीय अधिकारी – श्री ए एन सिंह, संयुक्त निदेशक उद्योग सहारनपुर मण्डल सहारनपुर !

    7.मोबाइल नम्बर:9837841440
    8.विभाग का ई–मेल: MUZAFFARNAGARDIC2007
    9.विभाग की वेबसाइट:
    10.मुख्यालय का पता:आयुक्त एवं निदेषक उद्योग, उद्योग
                               निदेषालय, उ0प्र0, जी0टी0 रोड,
                               कानपुर।

    जिला उद्योग केन्द्र, मुजफरनगर

    क्र0सं0 पदनाम कार्य
    1 महाप्रबन्धक कार्यालयाध्यक्षप्रषासनिक एवं पर्यवेक्षण कार्य
    2 प्रबन्धक (मार्किटिंग)मार्किट सर्वे औद्योगिक विकास के आंकड़े एवं सूचनाओं सम्बन्धी कार्य
    3 परियोजना प्रबन्धक औद्योगिक प्रोजेक्ट तैयार कराना एवं कच्चे माल के सम्बन्ध में तकनीकी परामर्ष
    4 प्रबन्धक (ऋण)ऋण योजनाओं का संचालन एवं सरकारी देयों की वसूली सम्बन्धी कार्य
    5 प्रबन्धक (तकनीकी)औद्योगिक इकाईयों के प्रोजेक्ट के सम्बन्ध में तकनीकी जानकारी देना
    6 सहायक प्रबन्धकउद्यमियों को इकाई स्थापित करने में मदद करना एवं औद्योगिक इकाईयों के आंकडे़ एकत्र करना
    7 सांख्यकीयसहायक औद्योगिक इकाईयों से आंकड़े प्राप्त करना एवं सम्प्रेशण
     
       
    उद्यमियों को औद्योगिक इकाई को प्रारम्भ करने हेतु निम्न योजनाओं का संचालन जिला उद्योग केन्द्र द्वारा किया जा रहा है:–

    1.एकल मेज व्यवस्था :– जनवरी, 1999 से लागू
    इस योजना के अन्तर्गत औद्योगिक इकाईयां लाईसेंस/अनापत्ति प्रमाण–पत्र/अन्य कार्यों हेतु अपने आवेदन–पत्र जिला उद्योग केन्द्र में प्रस्तुत करते हैं। प्रत्येक षुक्रवार को सभी विभागों में नोडल अधिकारी जिला उद्योग केन्द्र में उपस्थित होकर अपने से सम्बन्धित आवेदन–पत्रों का परीक्षण कर आवेदन–पत्रों का निस्तारण करते हैं।

    2.जिला उद्योग बन्धु समिति :–
    उद्यमियों की समस्याओं के निराकरण हेतु जिलाधिकारी महोदय की अध्यक्षता में प्रत्येक माह जिला उद्योग बन्धु समिति की बैठक होती है, जिसमें उद्यमियों की समस्याओं/सुझावों का निराकरण किया जाता है। यह बैठक प्रत्येक माह के तीसरे मंगलवार या जिलाधिकारी/अध्यक्ष की सहमति के अनुसार विकास भवन सभाकक्ष में आयोजित की जाती है।

    3.प्रधानमंत्री रोजगार योजना:–
    यह योजना 2 अक्टूबर, 1993 को गांधी जयन्ती के अवसर पर षिक्षित बेरोजगार युवकों के लिये घोशित की गयी। इसके अन्तर्गत जो युवक/युवतियां कम से कम 8वीं पास हों और 18–35 वर्श से मध्य हों, अनुसूचित जाति/जनजाति/महिलाओं/विकलांग/भूतपूर्व सैनिक के अभ्यर्थियों के लिये उम्र में दस वर्श की छूट होगी। पात्र अभ्यर्थी के परिवार की वार्शिक आय एक लाख से अधिक नहीं होनी चाहिये। योजना के अन्तर्गत व्यवसायिक कार्यों के लिये ऋण की सीमा दो लाख एवं उद्योग/सेवा कार्यों के लिये ऋण की सीमा पांच लाख तक है। अभ्यर्थी का अंषदान अनुदान सहित योजना लागत का 20 प्रतिषत तक होगा।



    4.वर्तमान में जनपद में औद्योगिक आस्थानों/औद्योगिक क्षेत्रों की स्थिति :–
    क्र0सं0 औद्योगिक आस्थान/ औद्योगिक क्षेत्र का नाम बिजली की स्थिति कुल क्षेत्र (एकड़ में) षेड/प्लॉट आवंटित षेड/प्लॉट्स स्थापित इकाईयां
    1 इण्डस्ट्रीयल एस्टेट सूजडु, मुजफरनगर 132 के0वी0 सब स्टेषन, सूजडु 21.19 59 59 38
    2 इण्डस्ट्रीयल एस्टेट खेड़ीकरमू, पानीपत रोड, षामली 33 के0वी0 सब स्टेषन, इण्डस्ट्रीयल एस्टेट षामली 17.19 52 52 45
    3 इण्डस्ट्रीयल एरिया, मेरठ रोड, बेगराजपुर 132 के0वी0 सब स्टेषन, नरा 73.54 200 164 65
    4 हरिजन इण्डस्ट्रीयल एस्टेट, मेरठ रोड, मुजफरनगर 132 के0वी0 सब स्टेषन, सूजडु 12.65 27 27 19


     

    5.उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम द्वारा औद्योगिक क्षेत्र खेड़ीकरमू में विकसित किये जाने वाले औद्योगिक क्षेत्र का प्रस्ताव :–
    क्र0सं0 क्षेत्र का नाम इकाईयों का प्रकार बिजली की उपलब्धता इकाईयों की समस्या
    1 रुड़की रोड, मुजफरनगर स्टील, दवाईयां, रिफैक्ट्रीज, प्लास्टिक पाईप, कृशि यंत्र आदि बिजली उपलब्ध है रेडीमेड वस्त्र, इम्प्लीमेंट्स, आॅटो पाट्र्स, दवाईयां
    2 जानसठ रोड, मुजफरनगर पेपर एंड पल्प, कैल्षियन कार्बोनेट, फर्टीलाइजर, सीमेंट, पेस्टीसाइड्स, कोल्ड स्टोर, दवाईयां, कार्बन बिजली उपलब्ध है कागज एवं कागज से बने उत्पाद, कैमिकल्स, एसिटिक एसिड, एथल एल्कोहॉल, बिजली उपकरण, आॅटो पाट्र्स, कार्बन–डाई–आॅक्साईड आदि
    3 भोपा रोड, मुजफरनगर पेपर एंड पल्प, पी0वी0सी0 पॉवर आई0एस0 पाईप, एल0पी0जी0 सिलेंडर, सीमेंट, फर्टीलाइजर, कोल्ड स्टोरेज, इनसेक्ट्रीसाइड्स, पेस्टीसाइड्स, मिनरल वॉटर आदि बिजली उपलब्ध है कागज एवं कागज से बने उत्पाद, इंजीनियरिंग वक्र्स, यंत्र, मिनरल वॉटर, दवाईयां, फर्टीलाइजर, एल0पी0जी0 सिलेंडर, पी0वी0सी0आदि
    4 मेरठ रोड, मुजफरनगर रिफेक्ट्रीज, रोलिंग मिल, इंडेक्षन फर्नेनेस, आईजन टायर एंड ट्यूब, कन्टेनर्स, एच0डी0पी0ई0 बैग, कोयर फोर्म, लेक्टम फोम, दवाईयां, इनसेक्टीसाइड एंड पेस्टीसाइड्स आदि बिजली उपलब्ध है रोलिंग मिल्स, रिफरेक्ट्रीज, लोर नट एंड बोल्ट, वेल्डिंग, इलैक्ट्रोड्स, कैमिकल फर्टीलाइजर, खाद्य पदार्थ इण्डस्ट्रीज आदि
    5 सहारनपुर रोड, षामली पेपर एंड पल्स, कोल्ड स्टोरेज, रिम और एक्सेल आदि बिजली उपलब्ध है कागज एवं कागज उत्पाद मिल, लोर मिल, कॉपर, सुल्फर रोल आदि
    6 दिल्ली रोड, षामली यूटीन्सलस, रिम और एक्सेल, कृशि औजार, फाउंड्री आदि बिजली उपलब्ध है एल्यूमिनियम एवं स्टील रिम और एक्सल्ड, एग्रो बेस इण्डस्ट्रीज, फाउंड्री
    7 कैराना रोड, षामली इंडक्षन फर्नेस, रोलिंग मिल, फाउंड्री आदि बिजली उपलब्ध है वुडन स्पोन्स, रोलिंग मिल, फाउंड्री, पी0वी0सी0 आदि


     

    6.मध्यम एवं वृहद उद्योगों की स्थिति :–
    जनपद में 68 इकाईयां स्थापित हैं, जिनका विवरण निम्नवत् है–
     
    क्र0सं0 इकाईयों के प्रकार इकाईयों की संख्या रोजगार लागत (करोड़ में)
    1 चीनी मिल 11 17560 1024.30
    2 पेपर मिल 31 13950 156.40
    3 इंडक्षन फर्नेंस 14 724 31.30
    4 रोलिंग मिल्स 07 682 38.70
    5 डिस्टलरी 02 241 15.23
    6 कैल्षियन कार्बोनेट 01 514 16.43
    7 आॅक्सीजन गैस 01 22 3.15
    8 इंसेक्टीसाइड्स और पेस्टीसाइड्स 01 42 4.25
      योग 68 31735 1089.76

     

    7.चीनी मिलों के नाम :–
     
    क्र0सं0 चीनी मिलों के नाम क्षमता (मैट्रिक टन/दिन में)
    1 त्रिवेणी इंजीनियरिंग वक्र्स (चीनी इकाई), खतौली 12500 मै0टन
    2 गंगा किसान सहकारी चीनी मिल, मोरना 5000 मै0टन
    3 टिकोला चीनी मिल, टिकोला, रामराज 2500 मै0टन
    4 तितावी चीनी मिल, तितावी 5000 मै0टन
    5 रोहाना चीनी मिल कॉर्पोरेषन, रोहाना 1250 मै0टन
    6 मंसूरपुर चीनी मिल लिमिटेड, मंसूरपुर 5000 मै0टन
    7 दोआब चीनी मिल, षामली 5000 मै0टन
    8 मोनट चीनी मिल, गांव षामली–षामला, ब्लॉक ऊन 2500 मै0टन
    9 बजाज हिन्दुस्थान लि0, भैंसानी, बुढ़ाना 9000 मै0टन
    10 बजाज हिन्दुस्थान लि0, थानाभवन 9000 मै0टन
    11 उत्तम चीनी मिल, खाईखेड़ी 5000 मै0टन

     

    8.लघु स्तरीय औद्योगिक इकाईयों की स्थिति :–
     
    क्र0सं0 एन0आई0सी0 ग्रुप संख्या इकाईयों का नाम एस0एस0आई0 इकाईयों की संख्या लागत (करोड़ में) रोजगार
    1 20–21 खाद्य सामग्री 463 15.33 3534
    2 22 बेवरेजेज, तम्बाकू एवं तम्बाकू उत्पाद 12 7.30 60
    3 23 कॉटन टैक्सटाईल्स 22 7.63 151
    4 24 ऊनी, रेषमी एंड सिंथेटिक फाइबर टैक्सटाईल 02 0.64 24
    5 25 ज्यूर, हैम्प एंड मेस्ता टैक्सटाईल्स
    6 26 हौजरी एंड गारमेंट्स 1049 32.56 4552
    7 27 लकड़ी के उत्पाद 677 41.02 4308
    8 28 कागज उत्पाद एवं छपाई 229 80.91 1667
    9 29 चमड़ा उत्पाद 852 20.96 4800
    10 30 रबड़ एवं प्लास्टिक उत्पाद 142 9.97 936
    11 31 कैमिकल एवं कैमिकल उत्पाद 65 34.88 433
    12 32 नॉन–मैटेलिक मिनरल उत्पाद 76 32.22 428
    13 33 बेसिक मैटल इंडस्ट्रीज 51 43.22 312
    14 34 मैटल उत्पाद 28 1767 258
    15 35 मषीनरी एवं पाट्र्स(एक्सेप्ट इलैक्ट्रिकल) 321 45.26 1781
    16 36 इलैक्ट्रिकल मषीनरी एवं अपाट्र् 35 11.30 306
    17 37 ट्रांसपोर्ट एक्यूपमेंट एवं पाट्र्स 09 7.15 46
    18 38 मिसलेनियस मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज 1728 96.87 8722
    19 96–97 रिपेयरिंग एंड सर्विसिंग इंडस्ट्रीज 4250 111.12 14907
        योग 10001 616.03 47225
     
    9.सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम अधिनियम–2006 :–
    इस अधिनियम के अनुसार जो भी उद्यमी अपनी औद्योगिक इकाई स्थापित करना चाहता है, वह जिला उद्योग केन्द्र में अपना ज्ञापन प्रस्तुत करेगा, जिसकी पावती प्राप्त करेगा। अधिनियम के अनुसार जिस इकाई में यंत्र एवं संयंत्र में पूंजी निवेष रु0 25 लाख तक होगा, उसको सूक्ष्म तथा जिस इकाई में यंत्र एवं संयंत्र में पूंजी निवेष रु0 25 लाख से 5 करोड़ तक उसको लघु तथा 5 करोड़ से 10 करोड़ तक के पूंजी निवेष वाली इकाई को मध्यम उद्यम घोशित किया गया है।

    10.तकनीकी उन्नयन योजना :–.
    उ0प्र0 सूक्ष्म एवं लघु उद्योग तकनीकी उन्नयन (टैक्नोलॉजी अपग्रेडेषन) योजना एवं नियमावली :–
    उद्देष्य :– आर्थिक वैष्वीकरण और विष्व स्तरीय प्रतिस्पर्धा के नये वातावरण और उदारीकरण के सम्पूर्ण प्रभाव के परिप्रेक्ष्य में लघु उद्योगों के त्वरित विकास एवं प्रतिस्पर्धा क्षमता को विकसित करने के उद्देष्य से नई औद्योगिक नीति घोशित की गयी है तथा उद्योग मैत्री वातावरण पैदा कर प्रदेष के औद्योगिक विकास के लिये उत्तर प्रदेष विकास परिशद् का गठन किया गया है। प्रतिस्पर्धा के इस वातावरण में सूक्ष्य एवं लघु औद्योगिक इकाईयों के जीवित रहने और उनके उत्तरोत्तर विकास के लिये आवष्यक है कि अच्छी गुणवत्ता वाले अंतर्राश्ट्रीय स्तर की वस्तुएं बनायी जायें और छोटे उत्पादक उत्तरोत्तर अपनी गुणवत्ता में सुधार करें तथा ऐसी प्रक्रिया से उत्पादन करें, जो अंतर्राश्ट्रीय स्तर पर सबसे अच्छी तकनीक वाली हो तथा उनकी उत्पादन लागत न्यूनतम हो सके।
    अत: सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों की उपरोक्त आवष्यकताओं को देखते हुए उनकी पूर्ति हेतु इन उद्योगों की तकनीकी उन्नयन योजना के क्रियान्वयन हेतु यह नियमावली बनायी गयी है, जो वर्तमान ग्लोबल प्रतियोगिता हेतु सूक्ष्यम एवं लघु उद्योगों का आधुनिकतम तकनीकी के आयात/क्रय एवं गुणवत्ता में वृद्धि तथा उत्पादकता में सुधार की आवष्यकताओं की पूर्ति करेगी। इस नियमावली के अन्तर्गत निम्नलिखित सुविधायें दी जायेंगी –
    (क) सूक्ष्य एवं लघु औद्योगिक इकाईयों के तकनीक की खरीद और आयात, जिसके द्वारा गुणवत्ता में सुधार होगा और उत्पादन में वृद्धि होगी, को मान्यता प्राप्त/सक्षम संस्थानों सरकारी संस्थाओं और षोध केन्द्रों से प्राप्त करने में व्यय की गयी धनराषि का 50 प्रतिषत अनुदान देय होगा, जिसकी अधिकतम सीमा रु0 2.50 लाख होगी।
    (ख) सूक्षम एवं लघु औद्योगिक इकाईयों को इस प्रकार उत्पादन में वृद्धि और गुणवत्ता में सुधार हेतु वांछित अतिरिक्त मषीनों आदि की व्यवस्था हेतु 50 प्रतिषत पूंजी उपादान देय होगा, जिसकी अधिकतम सीमा रु0 2.00 लाख होगी।
    (ग) उपरोक्त (प्रस्तर–ख में अंकित) क्रय की गयी मषीनों और उपकरणों पर वित्तीय निगम या बैंकों से ऋण लिये जाने की दषा में वित्तीय संस्थाओं को देय ब्याज की आंषिक प्रतिपूर्ति करते हुए उपादान देय होगा। ब्याज उपादान 5 प्रतिषत वार्शिक की दर से दिया जा सकेगा, जिसकी अधिकतम सीमा रु0 50,000.00 होगी तथा यह सुविधा 5 वर्श तक दी जायेगी।
    (घ) आई0एस0आई0 या आई0एस0ओ0 श्रेणी के मानकीकरण प्राप्त किये जाने की दषा में आने वाले व्यय का 50 प्रतिषत उपादान के रूप में देय होगा, जिसकी अधिकतम सीमा रु0 2.00 लाख होगी।
    (ड.) उत्पादकता कौषल/बाजार तथा तकनीकी के अध्ययन और मान्यता प्राप्त संस्थाओं से परामर्ष प्राप्त किये जाने पर सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को इस व्यय की 90 प्रतिषत राषि अधिकतम सीमा रु0 50,000.00 तक अनुदान देय होगा।
    उपरोक्त सुविधायें निम्न षर्तों के अधीन उन सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों, जिनके द्वारा ‘‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम अधिनियम, 2006’’ के अधीन ज्ञापन (इण्टरपेन्योर्स मेमोरेण्डम) दाखिल किये गये हों, को प्रदान की जाये।
    (1) योजनान्तर्गत प्राप्त सुविधा/अनुदान प्राप्त करने के 5 वर्श की अवधि के अन्दर यदि इकाई बन्द होती है, तो योजना के अन्तर्गत समस्त प्रदत्त सुविधा/अनुदान इकाई को वापिस करने होंगे। इसकी वसूली राजस्व नियमों के अन्तर्गत की जायेगी।
    (2) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 के अधीन सूक्ष्म एवं लघु उद्योग की निर्धारित सीमा तक पूंजी निवेष किये जाने वाली इकाईयों को इस योजना के तहत सुविधायें अनुमन्य होंगी।
    (3) योजनान्तर्गत देष के अन्दर तथा देष के बाहर से आयातीत आधुनिकतम विकसित तकनीक प्राप्त करने वाली सूक्ष्म एवं लघु औद्योगिक इकाईयों को सुविधायें/अनुदान अनुमन्य करायी जायेगी।
    (4) बाजार तथा तकनीकी एवं उत्पादकता कौषल के अध्ययन हेतु भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेष सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थाओं से परामर्ष प्राप्त किये जाने पर ही उपादान देय होगा तथा इसका पैनल षासन द्वारा अनुमोदित किया जायेगा।
    (5) प्रस्तावित नियमावली के प्रस्तर क, उप प्रस्तर ख एवं घ में की गयी व्यवस्था से एक ही मद में दोहरा लाभ नहीं मिलेगा।