स्वामी कल्याण देव राजकीय आयुर्वेदिक कालेज एवं चिकित्सालय, रामपुर, मुजफरनगर (उ0प्र0)

आयुर्वेद की शुरूआत ब्रमा जी द्वारा की गयी थी तथा प्रजापति/दक्ष–प्रजापति और अश्वनी कुमारों के पश्चात् इस धरती पर अग्निवेश तन्त्र से चरक, धनवन्तरि भगवान, सुश्रुत, बागपट, नागाजु‍र्न आदि ऋषि मुनियों द्वारा आयुर्वेद का ज्ञान पृथ्वी लोक पर दिया गया था।
 

1– विभागाध्यक्ष का पदनाम:                      प्राचार्य / अधीक्षक

पता:   स्वामी कल्याण देव राजकीय आयुर्वेदिक कालेज एवं चिकित्सालय, रामपुर, मुजफरनगर (उ0प्र0)

विभाग का पता:स्वामी कल्याण देव राजकीय आयुर्वेदिक कालेज एवं चिकित्सालय, रामपुर, मुजफरनगर (उ0प्र0)

दूरभाष: 0131–2441795
फैक्स: 0131–2441795

1.जनसूचना अधिकारी का नाम:प्रो0 रामसिंह '

2.सहायक जनसूचना अधिकारी:डा0 अनिल वर्मा

3.अपीलीय अधिकारी:निदेशक, आयुर्वेदिक सेवाएं9वां तल, इन्दिरा भवन, लखनऊ

मुख्यालय का पता:निदेशक, आयुर्वेदिक सेवाए 9वां तल, इन्दिरा भवन, लखनऊ दूरभाष:0522–2287085 फैक्स

वर्तमान में संस्था द्वारा निम्न कार्य किये जा रहे हैं –

1.यह संस्था छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर से सम्बद्ध है, जिसमें सी.पी.एम.टी. से चयनित छात्र/छात्राओं को बी.ए.एम.एस. डिग्री प्रदान की जाती है तथा उनको निम्न विभागों में अध्यापन कार्य कराया जाता है –
1–संहिता संस्कृत एवं सिद्धान्त – आयुर्वेद का प्रारम्भिक इतिहास, अष्टांग संग्रह, पदार्थ विज्ञान, संहिता ग्रन्थ आदि का अध्ययन कराया जाता है।
2–रचना शरीर – शरीर रचना से सम्बन्धित ज्ञान कराया जाता है।
3–क्रिया शारीर – शारीर क्रियाओं का ज्ञान कराया जाता है। (Physiology)
4–द्रव्य गुण – औषधि द्रव्यों का अध्ययन कराया जाता है।
5–रस शास्त्र एवं भैषज्य कल्पना – इसमें औषधियां बनाने का कार्य सिखाया जाता है।
6–रोग एवं विकृति विज्ञान – रोगों से उत्पन्न विकृत के विषय में अध्ययन कराया जाता है।
7–स्वस्थ्य वृत्त – रोगी के स्वास्थ्य के विषय में ज्ञान कराया जाता है।
8–अगद तंत्र एवं विधि आयुर्वेद – विष एवं पोस्टमार्टम से सम्बन्धित अध्ययन कार्य कराया जाता है।
9–प्रसूति एवं स्त्री रोग – गर्भवती स्त्री एवं स्त्री रोगों से सम्बन्धित अध्यापन कार्य कराया जाता है।
10–कौमार्य भृत्य – बाल रोग (Pediatric)  से सम्बन्धित अध्यापन कार्य कराया जाता है।
11–काय चिकित्सा एवं पंचक्रम – रोगों की चिकित्सा की जाती है एवं शरीर का शोधन किया जाता है।
12–शल्य तंत्र – सर्जरी संबंधी / आप्रेशन संबंधी अध्ययन कार्य किया जाता है।
13–शालक्य तंत्र – नाक, कान, गला एवं आंख के रोगों के इलाज से सम्बन्धित अध्ययन कार्य कराया जाता है।
2.आयुर्वेद पद्धति से निम्न रोगों का इलाज ओ.पी.डी./आई.पी.डी. सुविधा के अनुसार इस संस्था में किया जाता है –
अम्लपित्त (Hyper Acidity),  शीतपित्त (Urticaria), रक्तपित्त (Haemorrhagic & Coagulation disorder), उदर रोग  (Abdominal disease), ग्रहणी रोग – पेचिस  (Chronic dysentery), बवासीर(Piles),   भगन्दर (Fistula),  श्वंास–कास (Ashtma), हृदय रोग (Heart disease),  हिस्टीरिया (Hysteria), आमवात संधिवात (Rheumatic Arthritis), रक्तवात (Gout),  गृध्रसी (Sciatica),   प्रमेह (Diabetes insipidus),  मधुमेह  (Diabetes), अश्मरी (Kidney & Urinary bladder stone), ज्वर (Fever), अष्ठीला (Enlarged Prostate), मूत्र रोग (Urinary disease), श्वित्र (Leucoderma/Vitiligo), पाण्डु (Anaemia), कामल (Jaundice), श्वेत रक्त प्रदर (Leucorrhoea), रोग शिरो रोग (Migrain), रक्तगतवात (Hypertension), विश्वाची (Brachial Neuritis), अवबाहुक (Forzen Shoulder), पक्षाघात (Paralysis), पक्षवध (Hemiplegia), अर्दित (Facial Paralysis), एकांगवात (Monoplagia), पाददाह (Burning Feet),  यकृत रोग  (Liver disease), तथा ब्लड प्रेशर (Blood Pressure).  
3.ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा शिविर लगाकर उपचार कराया जाता है।
4.संस्था की भूमि पद्म भूषण वीतराग स्वामी कल्याण देव जी महाराज के कर–कमलों द्वारा आयुर्वेद के अध्यापन हेतु उपलब्ध करायी गयी थी, जो कि उनको विभिन्न लोगों द्वारा दान स्वरूप प्राप्त थी। दिनांक 10.08.1978 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सात आयुर्वेदिक कालिजों के अधिपत्य करने में इस कालिज का भी नाम था, जो कि प्राईवेट से राज्य सरकार के अधीन दिनांक 10.08.1978 से कार्य कर रहा है।


प्रमाण – पत्र

प्रमाणित किया जाता है कि अधोहस्ताक्षरित द्वारा उपलब्ध करायी गयी जानकारी विभागीय रिकार्ड के अनुसार त्रुटिरहित है। सी0डी0 में दी गयी सूचना को जनपद की वेबसाइट पर प्रकाशित करा दिया जाये।



(प्रो0 रामसिंह)
प्राचार्य/अधीक्षक
स्वामी कल्याण देव राजकीय आयुर्वेदिक
कालेज एवं चिकित्सालय, रामपुर, मुजफरनगर (उ0प्र0)


 

दावात्याग:(Disclaimer) एन0आई0सी0 मुजफ्फरनगर इस वेबपृष्ठ पर प्रकाशित गलती के लिये जिम्मेदार नहीं है । इस वेबपृष्ठ पर दी गयी सामग्री एवं तथ्‍यों का उपयोग विधिक उददेश्‍य हेतु नहीं किया जा सकता।अधिक जानकारी के लिये सम्बन्धित विभाग से सम्पर्क करें ।

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