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जिला
गन्ना अधिकारी
विभाग का पता– सरकुलर रोड,
गन्ना किसान संस्थान, मुजफरनगर
दूरभाष– 0131–2622248
फैक्स– 0131–2622247
1–जनसूचना अधिकारी का नाम– वी0के0षुक्ल
2–सहायक जन सूचना अधिकारी का नाम– श्रीमति सीमा देवी
3–अपीलीय अधिकारी का नाम– डा0 आर0एल0उपाध्याय
मुख्यालय का पता– सरकुलर रोड, गन्ना किसान संस्थान,
मुजफरनगर
दूरभाष– 0131–2622248
फैक्स– 0131–2622247
गन्ना विभाग द्वारा निम्न योजनायें गन्ना कृषकों के हित में चलाई जा रही है।
जिला योजना :– इस योजना के अन्तर्गत उ0प्र0 शासन द्वारा विभाग की दो योजनाओं सघन
गन्ना विकास योजना एवं अन्र्तग्रामीण सडक निर्माण योजना में धनराशि उपलब्ध करायी
जाती है। सघन गन्ना विकास योजना के अन्तर्गत तीन कार्यक्रम सम्मिलित है। सक्षिंप्त
विवरण निम्न प्रकार है।
1– सघन गन्ना विकास योजना :–
(अ) उन्नतिशील गन्ना बीज उत्पादन एवं वितरण कार्यक्रम :–इस कार्यक्रम के अन्तर्गत
शोध केन्द्रो पर विकसित उन्नतशील गन्ना प्रजातियों के बीजों की बुवाई कराकर कृषकों
के खेतों, चीनी मिलों के फार्मो पर विभागीय देखरेख में क्रमश: आधार एवं प्राथमिक
पौधशालाऐं रखी जाती है। इन पौधशालाओं में तैयार बीज की सामान्य बुवाई के लिए कृषकों
को वितरित किया जाता है। पौधशाला धारकों को सामान्य श्रेणीं का होने पर आधार पौधशाला
पर 1000/– रू0 एवं प्राथमिक पौधशाला पर 500/– रू0 प्रति हैक्टेयर अनुदान दिया जाता
है जबकि पौधशाला धारक अनुसूचित जाति/ जनजाति को होने पर उपरोक्त से दुगुना अनुदान
दिया जाता है।
(ब) बीज/भूमि उपचार कार्यक्रम :–इस कार्यक्रम के अन्तर्गत चीनी मिल क्षेत्रों में
गन्ने की फसल पर लगने वाले कीट एवं रोग से बचाव हेतु बीज/भूमि उपचार के लिए कृषकों
को कीटनाशक रसायनों का वितरण कराया जाता है तथा ऐसे रसायनों के वितरण पर 2500
टी0सी0डी0 क्षमता वाली चीनी मिलों के क्षेत्रों में लागत का 25 प्रतिशत एवं उससे
अधिक क्षमता वाली चीनी मिल क्षेत्रों में 12.50 प्रतिशत राजकीय अनुदान दिया जाता
है। इसके अतिरिक्त 10 प्रतिशत गन्ना विकास परिषदों द्वारा अपने स्त्रोत से अनुदान
दिया जाता है।
(स) पेडी प्रबन्धन कार्यक्रम :– इस कार्यक्रम के अन्तर्गत गन्ने की पेडी फसल की
अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए रोग, कीटनाशक दवाईयों एवं यूरिया छिडकाव के लिए कृशकों
को वितरित रसायनों पर अनुदान दिया जाता है। अनुदान की दर बीज/ भुमि उपचार कार्यक्रम
में दिये गये विवरण के अनुसार है।
2– अन्र्तग्रामीण सडक निर्माण योजना:– इस योजना के अन्तर्गत चीनी मिल क्षेत्रों में
कृषकों के खेतों से चीनी मिल तक गन्ना ढुलाई को सुगम बनाने एवं यातायात की सुविधा
सुदृढ करने के लिए अंशदायी आधार पर अन्र्तग्रामीण पक्की सडकों का निर्माण कराया जाता
है। जिसकी लागत का 50 प्रतिषत इस योजना के अन्र्तगत राजकीय मद से प्राप्त होता है
तथा शेष 50 प्रतिषत गन्ना विकास परिषदों द्वारा स्वयं वहन किया जाता है।
समतामूलक योजना:– अनुसूचित जाति/जनजाति के कृषकों को गन्ने की खेती के लिए
प्रोहत्साहित किये जाने हेतु राज्य सैक्टर की इस योजना में निम्न कार्यक्रम
सम्मिलित हैं–
1– क्षेत्र प्रदर्शन:– इसके अन्तर्गत अनुसूचित जाति/जनजाति के कृषकों के खेतों पर
0.200 हैक्टेयर को प्रदर्शन रखा जाता है और प्रदर्शन धारक को 2000/–रू0 प्रति
प्रदर्षन अनुदान दिया जाता है।
2– समिति की सदस्यता:– इसके अन्तर्गत चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति कराने एवं
विभागीय योजनाओं का लाभ प्रदान किये जाने हेतु अनुसूचित जाति/जनजाति के कृषकों को
मात्र 21/–रू0 लेकर उन्हें गन्ना समिति का सदस्य बनाया जाता है तथा सदस्यता शुल्क
की शेष धनराषि 200 रू0 प्रति सदस्य इस योजना के अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा भुगतान
की जाती है।
3– नि:शुल्क बीज वितरण:– इसके अन्र्तगत अनुसूचित जाति/जनजाति के कृषकों को गन्ने
खेती के प्रोत्साहन एवं खेती के शुरू करने के लिए 10 कु0 प्रति कृषक उन्नत प्रजाति
का स्वस्थ गन्ना बीज प्रति कृषक उपलब्ध कराया जाता है और बीज की लागत राज्य सरकार
द्वारा वहन की जाती है।
मैक्रोमैनेजमेंट आफ एग्रीकल्चर–शुगर केन डवलपमेन्ट :– केन्द्र सरकार द्वारा वित्त
पोषित इस योजना के अन्तर्गत संचालित कार्यक्रमों का विवरण निम्न प्रकार है।
1–क्षेत्रप्रर्दशन :– इस कार्यक्रम के अन्तर्गत गन्ना कृषको के खेत पर प्रदर्शन
स्थापित कराये जाते है। प्रति प्रदर्शन क्षेत्रफल 0.500 हैक्टे0 होता है। इन
प्रर्दशनों पर प्रति प्रर्दशन 7500/– रू0 अनुदान के रूप में कृशकों को भुगतान किया
जाता है।
2–आधार पौधशाला :– इस कार्यक्रम के अन्तर्गत गन्ना शोध केन्द्रो से उन्नतशील
प्रजातियों का क्रेन्द्रक बीज उपलब्ध कराकर आधार पौधषाला कृषकों के खेतों पर रखवाई
जाती है तथा लागत का दस प्रतिशत या अधिकतम प्रति हैक्टेयर 4000/– रू0 राजकीय अनुदान
के रूप में कृषको को भुगतान किया जाता है।
3–कृर्षि संयत्र :– इस कार्यक्रम के अन्तर्गत गन्ना उत्पादकों को पशु/मानव चालित
यन्त्रों के कुल मूल्य का 25 प्रतिशत या 2500/– रू0 अनुदान जो कम हो दिया जाता है
एवं टैक्टर चालित यन्त्रों के कुल मूल्य का 25 प्रतिशत या 15,000/– रू0 अनुदान जो
कम हो दिया जाता है।
4–एम0एच0ए0टी0संयत्र :– इस कार्यक्रम के अन्तर्गत गन्ना बीज को शोधित करने हेतु चीनी
मिलों में एम0एच0ए0टी0 संयंत्र स्थापित कराये जाते है प्रति संयंत्र सत्यापन
उपरान्त कुल लागत का 50 प्रतिशत अकंन 3,00,000/–रू0 (तीन लाख रू0) 50 प्रतिशत
राजकीय अनुदान दिया जाता है ।
5–ड्रिप सिंचाई :– जल संरक्षण एवं कम पानी में अधिक उत्पादन को बढावा देने के लिए
कृषकों द्वारा अपने खेत में ड्रिप सिंचाई संयत्र लगवाने पर लागत का 25 प्रतिशत या
अधिकतम 30000/–रू0 प्रति हैक्टेयर सहायता उपलब्ध कराई जाती है। शेष धनराशि कृषको
द्वारा स्वयं वहन की जाती है ।
6– टयूबवैल/पंम्पिंग सेट की बोरिंग:– इसमें किसानों को अपने खेत पर बोरिंग कराने पर
लागत का 25 प्रतिशत या अधिकतम 12,000/रू0 अनुदान दिया जाता है।
7– सूक्ष्म उर्वरकों का वितरण:– इसमें किसानों का सूक्ष्म पोशक तत्वों की खरीद पर
लागत का 25 प्रतिशत या अधिकतम 1000/रू0 अनुदान दिया जाता है।
8–माडल फार्मो पर किसानों की विजिट:– इसके अन्तर्गत कृषि षोध एवं प्रशिक्षण संस्थानों
के मॉडल फार्मो पर 40 कृषकों का दल भ्रमण कराया जाता है तथा व्यय का 50 प्रतिषत अथवा
50000/रू0 अनुदान दिया जाता है।
9–कृषकों का प्रषिक्षण:– इसके अन्र्तगत कृषकों का गन्ना किसान संस्थान के माध्यम से
जिले एवं राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कराया जाता है।
सदस्यता‘–चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति की सुविधा केवल उन्ही किसानों को प्रदान की
जाती है जो समिति के विधिवत सदस्य हो । नये सदस्य बनाने हेतु वर्तमान सत्र में 30
सितम्बर तक की तिथि नियत है। जिन किसानों को समिति की सदस्यता ग्रहण करनी हो वे
21.00 रू0 शुल्क जमा कर समिति के सदस्य बन सकते है तथा शुल्क का शेष 200.00 रू0
उनकी गन्ना आपूर्ति पर देय गन्ना मूल्य से समायोजित किया जायेगा।
क्राप कम्पटीशन:– प्रति वर्श जोनल, क्षेत्रीय एवं राज्य स्तर पर गन्ना प्रतियोगिता
आयोजित की जाती है। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आवेदन पत्र गन्ना विकास परिषद
कार्यालय से प्राप्त किये जा सकते है। फसल की कटाई के उपरान्त पौधा, पेडी तथा अगेती
प्रजाति की प्रत्येक श्रेणी में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाने वाले
प्रतिभागियों को निम्न प्रकार पुरस्कार प्रदान किया जाता है –
राज्य स्तर पर – क्रमश: 10,000, 7000 एवं 5000
क्षेत्रीय स्तर पर – क्रमश: 7000, 5000 एवं 3000
जोनल स्तर पर – क्रमश: 3000, 2000 एवं 1000
कृषक का सटटा–सर्वप्रथम कृषकों द्वारा बोये गये गन्ना क्षेत्रफल का सर्वेक्षण माह
मई–जून में प्रति वर्ष किया जाता है तत्पश्चात कृषक के कुल गन्ना क्षेत्रफल को जनपद
की गन्ने की औसत उपज 595.44 कु0 /हैक्टे0 से गुणा करके उसकी कुल उपज प्राप्त की जाती
है। कृषक द्वारा की गई विगत 2 वर्षों की गन्ना आपूर्ति के औसत को उसका बेसिक कोटा
माना जाता है जो अधिकतम कुल उपज के 85 प्रतिषत तक कृषक को सटटा माना जाता है। इसी
कृषक का अधिकतम सटटा 3500 कु0 अथवा उपज बढोत्तरी की दषा में 5000 कु0 हो सकता है।
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