ग्रामीण अभिंयंत्रण सेवा, प्रखण्ड
मुजफ्फरनगर
स्थापना
उत्तर प्रदेश में मात्र छ: प्रषासकीय तकनीकी विभाग को मान्यता प्रदान की गई
जिसमें कि लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, लघु सिंचाई विभाग, भूगर्भ जल
सर्वेक्षण, विद्युत सुरक्षा के अतिरिक्त मात्र ग्रामीण अभिंयत्रण सेवा
विभाग को मान्यता दी गई ग्रामीण अभियंत्रण सेवा की स्थापना ग्रामीण
अवस्थापना के सुदृढीकरण के उद्देश्य्य से एक मात्र अभियांत्रिकी विभाग के
रूप में 01.07.1972 में की गई पूर्व स्थापित लोक निर्माण विभाग के
समानान्तर स्थापित किये गये इस विभाग में पूर्ण रूपेण प्रमुख अभियंता से
लेकर अवर अभियंता स्तर तक का तकनीकी मानव संसाधन ग्रामीण एवं अद्र्ध शहरी व
शहरी क्षेत्र में जनकार्य के निर्माण का पर्याप्त अनुभव तथा मार्ग निर्माण
एवं भवन निर्माण की उत्कृष्ट विशेषता उपलब्ध है। प्रदेश के एपीसी ब्रांच के
नियंत्रणाधीन ग्राम्य विकास विभाग के अन्तर्गत स्थापित किये गये इस तकनीकी
विभाग को मूलत: जिला पंचायत योजना की बजट राशि एवं ग्रामीण विकास के समस्त
कार्यो के निर्माण कार्यो को दायित्व सौंपा जाता है।
स्स्थापना काल से 36 वर्श व्यतीत हो जाने, विभिन्न श्रेणी के निर्माण कार्यो
में परिपक्वता तथा विशिष्टता की छवि होने तथा ग्रामीण एवं शहरी मूल भूत
अवस्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने आदि के कारण प्रदेश सरकारों तथा
माननीय जनप्रतिनिधियों द्वारा विभाग को पर्याप्त महत्व दिया गया है। जिसके
आधार पर वर्तमान में ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग को कैबिनेट मंंत्री,
प्रमुख सचिव तथा सचिवालय में प्रथक अनुभाग आवंटित किया गया है।
उद्देष्य
इस विभाग का कार्य क्षेत्र निर्धारित न होने के कारण अपना विभागीय कोई
निर्माण अथवा अनुरक्षण बजट न होने के कारण प्रदेश की मार्ग नीति में विभाग
का दर्जा न दिये जाने के कारण जिले मे घटित होने वाली जिला योजना में कोई
प्रतिनिधित्व किये जाने के कारण विभाग के अनुभव व तकनीकी श्रम संसाधन का
सार्थक एवं सुनिष्चित उपभोग प्रदेश हित में किया जा रहा है।
विभाग को निर्माण कार्यो हेतु प्राप्त राशि के कार्य पूर्ण गुणवत्ता,
सम्बद्धता और मानकों के अनुरूप पूरा कराने के लिए इंजीनियरिंग विभाग
प्रतिबद्ध है। सदैव की भाति इस संवर्ग विभाग के दायित्व और कठिन परिश्रम,
त्याग तथा कर्मठता से निर्माण कार्यो को क्रियान्वयन करता है। जो निर्माण
कार्य इस विभाग द्वारा सम्पन्न कराये जाते है उनका यह उद्देष्य है कि जनता
को पूर्ण रूपेण लाभान्वित एवं सुविधा प्राप्त हो।
विकास खण्ड में निर्माण कार्य
अवर अभिंयता स्तर को विभाग एवं विकास खण्ड दो वर्गो में विभाजित किया जाता
है। जिसमें विभाग को प्राप्त होने वाले निर्माण कार्य विभाग के सम्बन्धित
अवर अभियंता द्वारा मार्ग एवं भवन निर्माण कार्य को तकनीकी सम्बद्धता,
गुणवत्ता, मानक के अनुरूप ही सम्पादित कराया जाता है। विभाग के अवर अभियंता
द्वारा डिपॉजिट निर्माण कार्य संचालित व सम्पादित किया जाता है। जिसमें
प्रारम्भिक आगणन/प्रस्ताव के आधार पर कार्य की मात्रा के स्वीकृति और लागत
धनराशि का आवंटन षासन जिला ग्राम्य विकास अभिकरण विभाग द्वारा किया जाता
है। प्रारम्भिक प्राक्कलन से लेकर अनुबंध गठन तक व्यवहारिक तौर पर जो
नियमानुसार समय दिया जाता है। उसे सम्बद्धता से सम्पादित किया जाता है इस
विभाग द्वारा निश्पादित होने वाले निर्माण कार्य अत्यंत लघु प्रकृति के होते
है जिनकी लागत रू0 25000 से 100000 या 200000 तक की होती है। जिनकी धनराशि
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण विभाग द्वारा उपलब्ध करायी जाती है इस विभाग
द्वारा प्रदेश सरकार के उच्चस्थ महत्वपूर्ण डा0 अम्बेडकर ग्राम विकास योजना,
सांसद योजना, विधायक योजना एवं जिला स्तर पर अन्य विभाग द्वारा दिये गये
निर्माण कार्यो को तकनीकी स्वीकृति व धन आवंटन उपरान्त सम्बद्धता व गुणवत्ता
के साथ सुचारू रूप से सम्पादित किये जाते है।
विभाग का एक अवर अभियंता विकास खण्ड अधिकारी के कार्यालय मे तैनात किया जाता
है जो विकास खण्ड कार्यालय में भवन व मार्ग निर्माण कार्यो को तथा विभिन्न
योजनाओं में प्राप्त कार्यो को निश्पादित कराते है
प्रधानमंत्री ग्राम्य सडक योजना
विभाग में संचालित 51 पी0आई0यू0 विभागीय अवर अभिंयंताओं को कार्य भार सौपा
गया है। इस योजना में पर्याप्त बजट धनराशि के अन्तर्गत तकनीकी पर्यवेक्षण
द्वारा लगभग रू0 1200 करोड की लागत का निर्माण कार्य सफलता पूर्वक
निष्पादित कराया जा रहा है।
धनावंटन
विभाग को उ0प्र0 षासन स्तर से कोई धनराशि का आवंटन नही किया जाता है। अपितु
इस विभाग को सांसद निधि एवं ग्राम विकास अभिकरण द्वारा विकास कार्यो के
निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध करायी जाती हैं जिसके विरूद्ध निर्माण कार्य
तकनीकी व गुणवत्ता सहित मानक के अनुरूप कराये जाते है इसी प्रकार विधायक
निधि योजना के अन्तर्गत ग्राम विकास अभिंकरण द्वारा धनराशि उपलब्ध होने के
उपरान्त निर्माण कार्य को सम्पादित कराया जाता है। इसके अतिरिक्त जिला व
षासन स्तर पर विभिन्न योजनाओं में जो धनराशि प्राप्त होती है, को डिपॉजिट
बजट मिलने और पूर्व स्वीकृत प्राक्कलन के आधार पर धन आवंटन प्राप्त होने पर
ही विभाग द्वारा कार्यो को निश्पादन किया जाता है।
ड्रांइग
अधिश्ठान के कार्य विभाग में प्रखण्ड स्तर पर ड्राइंग अधिश्ठान की व्यवस्था
की गई है। जिसमें संगणक प्रभावी रूप से कार्यरत है। जो कार्यो के प्राक्कलन
व अनुबंध की दरे चेक करते है अथवा रिपोर्ट का पटल देखते है इनके अधिनस्थ
मानचित्रकार व अनुरेखक, तकनीकी कार्य जैसे ड्राइंग षीट, डुप्लीकेट व
ड्रेसिंग सम्बन्धी दायित्वों का निर्वाह करते है।
लेखा परिक्षण
विभाग में विभिन्न योजनाओं द्वारा जो निर्माण कार्य सम्पादित किये जाते है।
उस प्राप्त धनराशि का व्यय एवं लेखा परिक्षण (जांच करने ) के लिए
महालेखाकार इलाहाबाद की आॅडिट पार्टी के द्वारा प्राप्ति एकाउंट, डिपॉजिट
एकाउंट, तथा कार्ड एवेन्यू तथा इससे सम्बन्धित लेजर व मेन्टनेन्स का आॅडिट
प्रतिवर्श किया जाता है।
पंजीकरण ठेकेदार
विभाग में ठेकेदारो के पंजीकरण श्रेणी ई, डी, सी, ए एवं बी में दिये जाते
है ठेकेदारो के द्वारा विभागीय मार्ग व भवन निर्माण कार्य कराये जाने से
पूर्व विभाग में पंजीकरण कराने के उपरान्त ही कार्यो को कराया जाता है।
पंजीकरण करते समय श्रेणीवार षासन द्वारा निर्धारित जमानत धनराशि की
एन0एस0सी0 बंधक के रूप में कार्यालय अभिलेखो मेे जमा करायी जाती है जो
कार्य हित एवं विभागीय हित में रहती है
अत: विभाग भवन निर्माण कार्य व मार्ग निर्माण कार्यो को तकनीकी सम्बद्धता
एवं मानक के अनुरूप कराने में सक्षम है।
अधिशासी अभियन्ता,ग्रामीण अभिंयंत्रण सेवा,
प्रखण्ड मुजफरनगर