सरकारी विभाग

  • ग्राम्य विकास विभाग।

    जनउपयोगी योजनाओं तथा कार्यक्रम का प्रचार–प्रसार
    1– विभाग का नाम–ग्राम्य विकास विभाग।
    2– अधिकारी का पदनाम–1– मुख्य विकास अधिकारी
                                   2– जिला विकास अधिकारी
    3– योजना का नाम–डॉ0अम्बेडकर ग्रामसभा विकास योजना
     
    संक्षिप्त परिचय–
    शासनादेश संख्या 1140/66–2008–49/05 दिनांक 2–6–08 के द्वारा डॉ0अम्बेडकर ग्रामीण समग्र विकास योजना की संरचना एवं स्वरूप में व्यापक परिवर्तन किये जाने का निर्णय लेते हुए यह योजना अब डॉ0अम्बेडकर ग्रामसभा विकास योजना के नाम से जानी जायेगी।
    योजना का उद्देश्य–
    योजना का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश की ग्रामसभाओं में महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की वरीयता निर्धारित करते हुए इनका लाभ ग्रामवासियों को उपलब्ध कराया जाना है। डॉ0अम्बेडकर ग्रामसभा विकास योजनान्तर्गत प्रदेश की ग्रामसभा में अब स्थापना एवं जनसुविधा कार्यक्रमों का क्रियान्वयन चरणबद्ध ढंग से किया जाना है।

    योजना की रूपरेखा–
    शासनादेश संख्या 1642/66–2007–49/05 दिनांक 14,सितम्बर,07 के अन्तर्गत चयनित ग्रामसभाओं के संतृप्तीकरण हेतु 13 बिन्दु निर्धारित किये गये थे, जिनमें निर्धारित योजनाओं के लक्ष्यों के अनुसार संतृप्तीकरण की कार्यवाही की जा रही है। इसमें आंशिक संशोधन करते हुए सम्यक विचारोपरान्त निर्णय लिया गया है कि अब निम्नलिखित सर्वाधिक महत्वपूर्ण 05 कार्यक्रमों को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करते हुए ग्रामसभा में संतृप्तीकरण का निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कार्य सम्पन्न कराया जायेगा।

    योजना/कार्यक्रमों का निर्धारण–
    डॉ0अम्बेडकर ग्रामसभा विकास योजनान्तर्गत निम्नलिखित 05 विभागों द्वारा संचालित की जा रही महत्वपूर्ण योजनाओं/कार्यक्रमों का गुणवत्तायुक्त क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जायेगा।

     
    क्र0सं0 कार्यक्रम प्रशासनिक विभाग
    1 स्वच्छ शौचालय पंचायती राज विभाग
    2 मार्गो का निर्माण
      (क) सम्पर्क मार्ग लोक निर्माण विभाग
      (ख) सी0सी0रोड व के0सी0डे्रन पंचायती राज विभाग
    3 ग्रामीण विद्युतीकरण ऊर्जा विभाग
    4 स्वच्छ पेयजल ग्राम्य विकास विभाग
    5 ग्रामीण आवास एवं कृषि योग्य भूमि का आबंटन

    (i) आवासहीन का आवासीय पट्टा

    (ii) आवासहीन को आवास

    (iii) भूमिहीन को कृषि योग्य पट्ट

     

    राजस्व विभाग

    ग्राम्य विकास विभाग

     राजस्व विभाग

     
    ग्रामसभाओं का चयन–
    शासनादेश संख्या 1642/66–2007–49/05 दिनांक 14,सितम्बर,07 के द्वारा प्रत्येक वर्ष ग्रामसभाएॅ चरणबद्ध एवं समयबद्ध रूप से पॉच चरणों में संतृप्त की जायेगी। प्रथम चरण जनवरी,08 से मार्च,08 तक होगा। इस चरण हेतु वर्ष 2007–08 में जनपद में 41 ग्रामसभाआें का चयन हुआ है।
    चार चरण निम्न प्रकार से होगे–
     
    क्र0 सं0 चरण चरण की अवधि चरण में चयनित ग्रामसभाए
    1 द्वितीय चरण 01,अपै्रल,08 से 31,मार्च,09 72
    2 तृतीय चरण 01,अपै्रल,09 से 31,मार्च,2010 58
    3 चतृर्थ चरण 01,अपै्रल,2010 से 31,मार्च,2011 33
    4 पंचम चरण 01,अपै्रल,2011 से 31,मार्च,2012 20
     
    पूर्व में राजस्व ग्रामों को विकास हेतु चयनित किया गया था। अब ग्रामसभाओं को विकास की इकाई माना जायेगा। एक विधानसभा में कई राजस्व ग्राम एवं मजरे हो सकते है, इस कारण से यदि किसी डॉ0अम्बेडकर ग्रामसभा के अन्तर्गत पूर्व में एक राजस्व ग्राम को डॉअम्बेडकर ग्रामसभा के रूप में चयनित कर विकास कार्य कराये गये है तथा जिस ग्रामसभा में यह राजस्व ग्राम स्थित है, उसमें अन्य राजस्व ग्राम भी है तो इन अवशेष राजस्व ग्रामों का विकास भी उक्त योजना के अन्तर्गत किया जायेगा।

    चयनित सूची –
    वर्ष 2007–08 (प्रथम चरण),वर्ष 2008–09(द्वितीय चरण) , वर्ष 2009–10 (तृतीय चरण) , वर्ष 2010–11 (चतुर्थ चरण) एवं वर्ष 2011–12 (पंचम चरण) के पॉचों चरणों में चयनित डॉ0अम्बेडकर ग्रामसभाओं की सूची का चरणवार/वर्षवार विवरण निम्न प्रकार है–

     
    डा0 अम्बेडकर ग्रामसभा विकास योजनान्तर्गत चयनित ग्रामसभाओं की सूची
    जनपद का नाम– मुजफरनगर              चरण:– प्रथम            कुल चयनित डा0 अम्बेडकर ग्रामसभाओं की संख्या–41
    चयन का वर्ष:– 2007–08                 ग्रामसभाओं में निहित ग्रामों की संख्या–73
    ग्रामसभाओं में मजरो की संख्या–
     
    डा0 अम्बेडकर ग्रामसभा विकास योजनान्तर्गत चयनित ग्रामसभाओं की सूची
    जनपद का नाम– मुजफरनगर।        चरण:– द्वितीय             कुल चयनित डा0 अम्बेडकर ग्रामसभाओं की संख्या–72
    चयन का वर्ष:– 2008–09               ग्रामसभाओं में निहित ग्रामों की संख्या–135
    ग्रामसभाओं में मजरो की संख्या–
     
    डा0 अम्बेडकर ग्रामसभा विकास योजनान्तर्गत चयनित ग्रामसभाओं की सूची
    जनपद का नाम– मुजफरनगर।         चरण:– तृतीय              कुल चयनित डा0 अम्बेडकर ग्रामसभाओं की संख्या–58
    चयन का वर्ष:– 2009–10                 ग्रामसभाओं में निहित ग्रामों की संख्या– 99
    ग्रामसभाओं में मजरो की संख्या–
     
    डा0 अम्बेडकर ग्रामसभा विकास योजनान्तर्गत चयनित ग्रामसभाओं की सूची
    जनपद का नाम– मुजफरनगर।               चरण:– चतुर्थ                    कुल चयनित डा0 अम्बेडकर ग्रामसभाओं की संख्या–33
    चयन का वर्ष:– 2010–11                    ग्रामसभाओं में निहित ग्रामों की संख्या–56
    ग्रामसभाओं में मजरो की संख्या–
     
    डा0 अम्बेडकर ग्रामसभा विकास योजनान्तर्गत चयनित ग्रामसभाओं की सूची
    जनपद का नाम– मुजफरनगर।         चरण:– पंचम              कुल चयनित डा0 अम्बेडकर ग्रामसभाओं की संख्या–20
    चयन का वर्ष:– 2011–12                ग्रामसभाओं में निहित ग्रामों की संख्या–36
    ग्रामसभाओं में मजरो की संख्या–
     

    अम्बेडकर विशेष रोजगार योजना

    1– विभाग का नाम–           ग्राम्य विकास विभाग।
    2– अधिकारी का पदनाम–1– मुख्य विकास अधिकारी
                                   2– जिला विकास अधिकारी
    3– योजना का नाम–            अम्बेडकर विशेष रोजगार योजना
     

    संक्षिप्त परिचय
    अम्बेडकर विशेष रोजगार योजना वर्ष 2004–05 से जनपद–मुजफरनगर में चलाई जा रही है। वर्ष 2008–09 में इस योजना के संचालन हेतु शासन से जनपद को लक्ष्य व धनराशि प्राप्त नही हुए है। इस योजना के मुख्य आयाम निम्न है:–
    1–बेरोजगार व्यक्तियों को रोजगार स्थापित कराना (ग्रामीण क्षेत्र में)
    2–योजना के संचालन हेतु कुल लागत का 5प्रतिशत धनराशि से लाभार्थी को अपने नाम से लाभार्थी अंश के रूप में जमा कराकर बैंक में खाता खुलवाना पडता है।
    3–इस योजना अन्र्तगत लघु उद्योग से सम्बन्धित स्व रोजगार ईकाई स्थापित करायी जाती है।
    4–परियोजना की प्रति ईकाई लागत कम से कम 36,000/–रू0 निधार्रित है जिसमें प्रति लाभार्थी अनु0जाति के लिए अंकन 10,000/–रू0तथा सामान्य जाति के लिए 7500/–रू0 का अनुदान दिये जाने के शासन के आदेश है। शेष ऋण बैंक ऋण के रूप में होता है।
    5–इस योजना अन्र्तगत लघु उद्योग डनलप कोट, हेयर कटिंग, मिल्क प्रोडक्ट, पनीर,/खोया बनाना, सूक्ष्म जलपान, ढाबा, चर्म वस्त्र, पत्थर तराशी, मौन पालन, दुग्ध उत्पादन, ट्रैक्टर मरम्मत एवं पम्पिंग सैट, मरम्मत, पुर्जो की बिक्री, रेडीमेट गारमेंटस, मोढा उत्पादन व अन्य स्थानीय ईकाईयाँ।
    6–परियोजना विशिष्टता के अनुसार एस0जी0एस0वाई0 के अन्र्तगत ए0पी0एल0 लाभार्थी जो स्वयं सहायता समूहों के सदस्य है और द्वितीय ग्रेडिग भी उत्र्तीण कर चुके है, परन्तु उन्हें एस0जी0एस0वाई0 से कोई आर्थिक सहायता प्राप्त नही हुई है, उनके सफल रोजगार हेतु परियोजना में अम्बेडकर विशेष रोजगार योजना अन्र्तगत मानकों के अनुरूप लाभान्वित कराया जाता है।
    योजना का उद्देश्य
    ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगार व्यक्तियों को स्वरोजगार स्थापित कराना।

     

    राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना

     
    1–योजना का प्रारम्भ   प्रथम चरण– 02 फरवरी 2006 से।
                             द्वितीय चरण– 15 मई 2007 से।
                             तृतीय चरण– 01 अपै्रल 2008 से।
     
    2–उद्देश्य:–
    गा्रमीण क्षेत्रों के इच्छुक परिवारों को रोजगार सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन के श्रमपरक रोजगार की गारन्टी प्रदान करना।
     
    3–भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में चयनित जिलों की संख्या:–

    3.1– प्रथम चरण के 22 जिले:–
    सोनभद्र, उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, चित्रकूट, बाराबंकी, हरदोई, बांदा, महोबा, हमीरपुर, मिर्जापुर, कुशीनगर, फतेहपुर, गोरखपुर, आजमगढ़, जौनपुर, जालौन, कौशाम्बी, चन्दौली एवं प्रतापगढ़।

    3.2– द्वितीय चरण के 17 जिले:–
    अम्बेडकर नगर, बहराईच, बलिया, बलरामपुर, बस्ती, बदायू, एटा, फरू‍र्खाबाद, गोण्डा, कानपुर देहात, झांसी, महराजगंज, मऊ, सन्त कबीरनगर, श्रावस्ती, सिद्वार्थनगर, सुल्तानपुर।

    3.3– तृतीय चरण के 31 जिले:–
    गाजीपुर, देवरिया, संतरविदास नगर, फैजाबाद, औरेया, मैनपुरी, कन्नौज, पीलीभीत, बागपत, हाथरस, शाहजहाँपुर, इटावा, बुलन्दशहर, बिजनौर, इलाहाबाद, ज्योतिबाफुले नगर, रामपुर, मुजफरनगर, सहारनपुर, मथुरा, अलीगढ़, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, बरेली, गौतमबुद्व नगर, वाराणसी, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर नगर।
     
    4–योजना के मुख्य बिन्दु:–
    1.मांग आधारित योजना होने के कारण परिवारों का पंजीकरण ग्राम पचंायत में होगा।
    2.ग्राम पचंायत एक गु्रप फोटोयुक्त रोजगार कार्ड़ सम्बन्धित परिवार को जारी करेंगी जिसके आधार पर एक परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 100  दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जायेगा।
    3.मांग के 15 दिन के अन्दर श्रमिकों को कम से कम 14 दिन का रोजगार एक बार में उपलब्ध कराया जायेगा।
    4.ग्राम पंचायतें/कार्यक्रम अधिकारी रोजगार आवंटित करेंगी और इसका अभिलेख रखेंगी।
    5.रोजगार श्रमिके के निवास से 05 कि0मी0 के अन्दर दिया जायेगा। उससे अधिक दूरी होने पर 10 प्रतिशत अधिक मजदूरी भुगतान होगा।
    6.यदि 15 दिन के अन्दर रोजगार न दिया गया तो बेरोजगारी भत्ते का भुगतान किया जायेगा, जो वित्तीय वर्ष के ्रपथम 30 दिन के लिए मजदूरी का 1/4 और शेष दिनों के लिए 1/2 होगा।
    7.बेरोजगारी भत्ता दिये जाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।
    8.मजदूरी की दर राज्य द्वारा कृषि श्रमिकों के लिए निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के समतुल्य। प्रदेश में वर्तमान मजदूरी दर रू0 100/– प्रति मानव दिवस निर्धारित है।
    9.न्यूनतम 50 प्रतिशत व्यय भार की दृष्टि से कार्यो का क्रियान्वयन ग्राम पंचायतो द्वारा किया जायेगा।
    10.कार्य हेतु कम से कम 10 मजदूरों के उपलब्ध होने पर नये कार्य प्रारम्भ किये जा सकेंगे। सामग्री अंश 40 प्रतिशत से अधिक नही होगा। इसमें कुशल एवं अद्र्ध कुशल श्रमिकों की मजदूरी सम्मिलित है।
    11.ठेकेदारी व्यवस्था पर प्रतिबन्ध होगा एवं श्रमिकों को विरत करने वाली मशीनों का प्रयोग जहां तक पै्रक्टिकेबल हो, वर्जित होगा।
     
    4.योजनान्तर्गत कराये जाने वाले कार्य:–

    (i)जल संरक्षण और जल शस्य संचय।
    (ii)सूखारोधी (जिसके अन्तर्गत वनरोपरण और वृक्षारोपण है)।
    (iii)सिंचाई नहरें जिसके अन्तर्गत सूक्ष्म और लघु सिंचाई संकर्म भी है।
    (iv)अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों या गरीबी रेखा से नीचे के कुटुम्बों या भूमि सुधार के हिताधिकारियों की भूमि के लिए या   भारत सरकार की इन्दिरा आवास योजना के अधीन हिताधिकारियों की स्वंय की गृहस्थी भूमि के लिए सिंचाई सुविधा, बागवानी बागान और भूमि विकास की सुविधा।
    (v)पारम्परिक जल निकायों को नवीकरण जिसके लिए तालाबों का शुद्विकरण भी है।
    (vi)भूमि विकास।
    (vii)बाढ़ नियन्त्रण संरक्षण संकर्म, जिसके अन्तर्गत जलरूद्व क्षेत्रों में जल निकासी भी है।
    (viii)सभी मौसमों में पहुच का उपबंध करने के लिए ग्रामीण संयोजकता।
    (ix)कोई अन्य कार्य जिसे राज्य सरकार के परामर्श से केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाय।

     

    5.अनुमानित लेबर बजट के अनुसार लक्ष्य 32771 जाबॅकार्ड के सापेक्ष 27740 जाबॅकार्ड निर्गत कराये गये। 10074 श्रमिक परिवारों के द्वारा रोजगार की मांग की गई जिसके सापेक्ष 10074 परिवारो को रोजगार उपलब्ध कराकर 144402 मानव दिवस सृजित हुए है।
     

    महामाया आवास योजना का क्रियान्वयन

     
    गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे अनुसूचित जाति/जनजाति के आवासविहीन परिवारों को इन्दिरा आवास योजना के मानकानुसार आवास निर्माण हेतु राज्य द्वारा शत प्रतिशत वित्त पोषित महामाया आवास योजना सितम्बर 2007 से प्रारम्भ की गयी है । यह योजना अनुसूचित जाति/जन जाति के नये आवासों के निर्माण हेतू प्रदेश के गा्रामीण क्षे़त्रों में ही लागू होगी ।
    नये आवासों के निर्माण के लिए योजना के अन्र्तगत प्रति ईकाई लागत में सहायता अनुदान
    की सीमा निम्न प्रकार है । यह दरें 1–4–2008 के पश्चात स्वीकृत आवासों पर लागू होगी।

     
    निर्माण ईकाई मैदानी क्षेत्र बुन्देलखण्ड के 7 जनपदों में
    स्वच्छ शौचालय एवं धुआं रहित चूल्हा आवास का निर्माण रू0 35000 रू0 38500

    वित्तीय वर्ष 2007–08 में इस जनपद का लक्ष्य 85 आवासों का था जो वित्तीय वर्ष 2007–08 में पूर्ण कर लिया गया था ।
    वित्तीय वर्ष 2008–09 में महामाया आवास योजना का लक्ष्य इस जनपद का शून्य है ।

     

    राष्ट्रीय बायोगैस कार्यक्रम

    राष्टीय बायोगैस विकास कार्यक्रम अपारम्परिक उर्जा स्रोेत भारत सरकार का महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जो भारत सरकार द्वारा शतप्र्रतिशत वित्त पोषित है। योजना का क्रियान्वयन खण्ड विकास अधिकारी द्वारा किया जाता है। योजनान्र्तगत लाभार्थी को निम्न प्रकार अनुदान भुगतान की दर निर्धारित है।
     
    क्र0सं0 लाभार्थी श्रेणी केन्द्रीय अनुदान की धनराशि प्रति सयन्त्र
    1 अनुसूचित जाति/जनजाति,लघु एवं सीमान्त कृषक तथा भूमिहीन श्रमिक रू0 3500/– किन्तु 1 घनमीटर क्षमता के फिक्स्ड डोम टाइप बायोगैस संयन्त्र पर रू0 2800/–
    2 अन्य समस्त क्रमांक 1 के लाभार्थी श्रेणी को छोडकर रू0 2700/– किन्तु 1 घनमीटर क्षमता के फिक्स्ड डोम टाइप बायोगैस संयन्त्र पर रू0 2100/–
     
    टर्नकी पद्वति के माध्यम से बायोगैस संयंत्रों का निर्माण कराये जाने पर लगातार तीन वर्षो तक बायोगैस संयंत्रों की क्रियाशीलता करने का दायित्व टर्नकी एजेन्सी का होता है। इसके लिए भारत सरकार द्वारा सम्बन्धित को रू0 700/– प्र्रति संयंत्र की दर से टर्नकी जॉब फीस का भुगतान किये जाने का प्राविधान किया गया है।
    वित्तीय वर्ष 2008–09 मेंं इस योजनान्तर्गत वार्षिक लक्ष्य 70 बायोगैस संयंत्रो के निर्माण का प्राप्त हुआ है, जिसके सापेक्ष 13 बायोगैस संयंत्रों का निर्माण कराया जा चुका है।
     

    ग्रामीण पेयजल योजना

     
    ग्रामीण पेयजल आपूर्ति कार्यक्रम में निम्नलिखित योजनाओं के अन्तर्गत धनराशि शासन द्वारा निर्गत की जा रही है।
    1– त्वरित ग्रामीण पेयजल योजना
    2– ग्रामीण जल सम्पूर्ति जलोत्सरण योजना (सामान्य मद)
    3– ग्रामीण पेयजल योजना (अनुसूचित जाति के लिए विशेष घटक)
    उपरोक्त योजनाओं के अन्तर्गत प्राप्त धनराशि से नये इंडिया मार्क–।। हैण्डपम्प/स्थाई रूप से खराब हैण्डपम्पों के रिबोरिंग एवं पाइप पेयजल योजनाओं का कार्य कराया जाता है। इण्डिया मार्क–।। हैण्डपम्प अधिष्ठापन हेतु शासनादेशानुसार समय–समय पर प्राप्त निर्देशो के अनुसार 10 प्रतिशत सहभागिता अंशदान धनराशि उपलब्ध होने के उपरान्त नये हैण्डपम्पों का अधिष्ठापन कार्य जल निगम एवं यू0पी0 स्टेट एग्रो द्वारा कराया जाता है।
    वित्तीय वर्ष 2008–09 में नये हैण्डपम्प का लक्ष्य क्रमश: 2720 नग एवं रिबोर का लक्ष्य 1397 के सापेक्ष 575 नग नये एवं 730 रिबोर हैण्डपम्पों का कार्य कराया जा चुका है। शासन की प्राथमिकता के आाधार पर अम्बेडकर ग्रामसभाओं के कार्यो के साथ–2 अन्य असेवित बस्तियों में भी है0पं0 का कार्य कराया जा रहा है।
    ग्रामीण पाइप पेयजल योजनायें:– जनपद के अन्तर्गत गुणता प्रभावित बस्तियों में पाइप पेयजल योजनाओं की स्वीकृति उपरान्त धनराशि अवमुक्त होने पर गहरे नलकूप आधारित पाइप पेयजल योजनाओं का निर्माण कार्य कराया जाता है निर्माण कार्य पूर्ण होने के पश्चात पेयजल योजना सम्बन्धित ग्राम सभाओ को हस्तान्तरित कर दी जाती है, जिसका रखरखाव एवं संचालन ग्राम पंचायत द्वारा पेयजल श्रोतो से प्राप्त धनराशि से कराया जाता है। ग्राम सभा जिला प्रबन्धकन समिति जिसके अध्यक्ष ग्राम प्रधान होते है के द्वारा पेयजल योजनाओं का संचालन व्यवस्थित रूप से कराया जाता है।

    अधिशासी अभियन्ता

     

    जनउपयोगी योजनाओ का प्रचार प्रसार

     
    विभाग का नाम          ग्राम्य विकास विभाग
    अधिकारी का पदनाम   1–मुख्य विकास अधिकारी
                                2–जिला विकास अधिकारी
    योजना का नाम          स्वजलधारा
     

    संक्षिप्त परिचय
    प्रमुख सचिव,ग्राम्य विकास विभाग,उत्तर प्रदेश शासन,लखनऊ के पत्रांक 4600/38–5–02–650/2002 दिनांक 26 नवम्बर 2002 के साथ संलग्नक संयुक्त सचिव,ग्राम्य विकास मन्त्रालय,भारत सरकार के परिपत्र संख्या डब्ल्यू–11037/51/2002–टी0एम–111 दिनांक 16 नवम्बर 2002 के द्वारा समुदाय आधारित ग्रामीण पेयजल आपूर्ति कार्यक्रम पूरे देश में लागू किये जाने का निर्णय लिया गया । यह कार्यक्रम स्वजलधारा नाम से जाना जायेगा । स्वजलधारा कार्यक्रम के मुख्य आयाम निम्न प्रकार है–
    1.मांग आधारित और सामुदायिक भागीदारी का दृष्टिकोण ।
    2.पंचायत/समुदाय जल आपूर्ति की सभी योजनांए बनायेंगें ,कार्यान्वित करेंगें और उसका रखरखाव तथा प्रबन्धन करेगें ।
    3.समुदाय द्वारा पंूजी लागत में आंशिक भागीदारी की जायेगी ।
    4.पेयजल परिसम्पत्तियों का सम्पूर्ण स्वामित्व ग्राम पंचायतों के पास होगा ।
    5.संचालन और रखरखाब प्रयोक्ताओं/पंचायतों द्वारा किया जायेगा । सुधार के सिद्वान्त को अपनाने वाली ग्राम पंचायतें और क्षेत्र पंचायतें स्वजलधारा परियोजना की पात्र होंगी ।
    योजना का उद्देश्य
    ग्रामीण क्षेत्र की जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाना ।
    योजना की रूपरेखा

    स्वजलधारा योजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल सम्बन्धी सामुदायिक सहभागिता एंव मांग पर आधारित कार्यक्रम है । इस योजना केवल पाईप पेयजल सम्बन्धी योजनाओं को सम्मिलित किया जाता है । सामुदायिक अंशदान 20 प्रतिशत होता है ,सामुदायिक अंशदान के अतिरिक्त शेष राशि भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित है । माननीय सांसद एंव विधायक निधि या अन्य किसी सरकारी योजना से सामुदायिक अंशदान की राशि जमा कराया जाना पूर्ण प्रतिबन्धित है । योजना के अन्तर्गत अंशदान एकत्रीकरण तथा समुदाय उत्प्रेरण,तकनीकी सर्वेक्षण,डी0पी0आर0बनाने तथा नियोजन चरण के अन्य क्रियाकलापों हेतु राज्य पेयजल एंव स्वच्छता मिशन ,उत्तर प्रदेश के निर्देशों के क्रम में दो सहयोगी संस्थाओं को कार्य आबंटित किया गया । ग्राम स्तर पर गठित जल प्रबन्ध समितियों को ग्राम पेयजल एंव स्वच्छता समिति के रूप में पुर्नगठित कर इस योजना का ग्राम स्तरीय समस्त कार्य सम्पादित किया जाता है । वर्ष 2006–07 हेतु इस जनपद में 02 सहयोगी संस्थाओं अभिनव,बेगरजपुर,मु0नगर एंव धर्म ग्रामीण उत्थान संस्थान,हरिद्वार द्वारा चयनित जनपद की 24 ग्राम पंचायतों में इस योजना को क्रियान्वित करने हेतु प्रस्ताव राज्य पेयजल एंव स्वच्छता मिशन,उ0प्र0लखनऊ को प्रेषित किये गये थे जिनमें नियोजन चरण का कार्य सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से कराया जा चुका है जिसके अन्तर्गत उनके द्वारा चयनित 21 ग्राम पंचायतों में प्रस्तावित कार्यों की डी0पी0आर0(विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर स्वीकृति हेतु राज्य पेयजल एंव स्वच्छता मिशन,उ0प्र0लखनऊ को प्रेषित कर दी गयी है । वर्ष 2006–07 में चयनित ग्राम पंचायतों की सूची निम्न प्रकार है–

     

    क्रम संख्या विकास खण्ड का नाम ग्राम पंचायत का नाम
    1 सदर सहावली
    2 सदर वहलना
    3 सदर अलमासपुर
    4 सदर रामपुर
    5 सदर मखियाली
    6 बघरा बरवाला
    7 चरथावल रूकनपुर खांजापुर
    8 चरथावल सलेमपुर
    9 चरथावल महमूदपुर लकडसंघा
    10 चरथावल मलीरा
    11 खतौली नावला
    12 शामली चूनसा
    13 शामली बडौत
    14 शामली कुरमाली
    15 शामली भैंसवाल
    16 शामली बुटराडी
    17 शामली सिलावर
    18 शामली झाल
    19 शामली बहावडी
    20 कांधला लिसाढ हसनपुर
    21 कांधला फुगाना

    जिला विकास अधिकारी
    मुजफरनगर।